सावित्री भाभी की चुदाई की कहानी
January 3, 2026शिक्षक और छात्रा रसमिया खान की पहली मुलाकात की आग
मैं एक स्कूल शिक्षक हूं, 35 साल का, नाम राहुल। मेरी क्लास में रसमिया खान नाम की एक छात्रा पढ़ती थी—18 साल की, मुस्लिम लड़की, जिसकी आंखें काली और गहरी थीं, लंबे काले बाल और गोरी त्वचा। वो हमेशा स्कूल यूनिफॉर्म में इतनी आकर्षक लगती कि मेरी नजरें उस पर ठहर जातीं। लेकिन सब कुछ औपचारिक था, क्लासरूम में। फिर एक दिन, स्कूल प्रोजेक्ट के लिए मुझे उसके घर फोन करना पड़ा। वो पहली बार थी जब हमारी आवाजें एक-दूसरे से मिलीं।
फोन की घंटी बजी, और दूसरी तरफ से रसमिया की मधुर आवाज आई। ‘हैलो, सर?’ मैंने सोचा, ये आवाज कितनी सुरीली है—नरम, गर्माहट भरी। ‘हैलो रसमिया, मैं राहुल सर बोल रहा हूं। प्रोजेक्ट के बारे में बात करनी थी।’ हमने थोड़ी देर बात की, लेकिन मैं रुका न सका। ‘रसमिया, तुम्हारी आवाज बहुत अच्छी है। इतनी मीठी और आकर्षक।’ वो हंस पड़ी, शरमाई हुई। ‘थैंक यू सर। आपकी भी आवाज अच्छी है।’ वो पहली कॉल थी, लेकिन उसके बाद मैसेजेस शुरू हो गए। धीरे-धीरे बातें गहरी हुईं—स्कूल से बाहर, निजी जिंदगी तक। रसमिया ने बताया कि वो घर में अकेली महसूस करती है, पिता का देहांत हो चुका था। मैंने सहानुभूति दिखाई, और धीरे-धीरे हमारी बातें उत्तेजक हो गईं। वो मेरी आवाज सुनकर गर्म हो जाती, मैं उसके वर्णन से।
एक शाम, स्कूल के बाद, रसमिया ने मैसेज किया: ‘सर, क्या हम मिल सकते हैं? प्रोजेक्ट डिस्कस करने।’ मैंने हां कहा। हम एक पार्क में मिले। रसमिया साड़ी में थी—लाल रंग की, जो उसके कर्व्स को उभार रही थी। उसके होंठ गुलाबी, आंखें शरारती। हम बेंच पर बैठे, लेकिन बातें जल्दी ही इंटिमेट हो गईं। ‘सर, वो दिन जब आपने मेरी आवाज की तारीफ की, मैं रात भर सो न सकी।’ उसने कहा, हाथ मेरे हाथ पर रखते हुए। मैंने उसके चेहरे को छुआ। ‘तुम्हारी आवाज ने मुझे भी बेचैन कर दिया।’ फिर, अचानक, उसके होंठ मेरे होंठों से सट गए। वो किस गहरा था—जीभें लिपटीं, सांसें तेज। पार्क में अंधेरा हो चुका था, कोई नहीं था।
मैंने रसमिया का हाथ पकड़ा और पास के एक होटल की तरफ ले गया। कमरा बुक किया। अंदर घुसते ही हम कपड़े उतारने लगे। रसमिया की साड़ी खुली, उसके अंदर ब्लाउज और पेटीकोट। मैंने ब्लाउज खोला—उसके बड़े-बड़े स्तन बाहर आ गए, काले ब्रा में बंद। मैंने ब्रा उतार दी और उसके निप्पलों को मुंह में लिया। चूसने लगा, काटने लगा। रसमिया सिसकारी भरने लगी। ‘सर… अह्ह… कितना अच्छा लग रहा है।’ उसके हाथ मेरी शर्ट पर गए, उतार दी। फिर पैंट—मेरा लंड बाहर आ गया, 8 इंच का मोटा, सीधा खड़ा। रसमिया ने उसे देखा, आंखें फैल गईं। ‘सर, इतना बड़ा…’
वो घुटनों पर बैठ गई और मेरे लंड को मुंह में ले लिया। चूसने लगी—होंठों से लिपटाकर, जीभ से चाटकर। मैं उसके बाल पकड़कर गले तक धकेलने लगा। ‘हां रसमिया… अच्छे से चूस… तेरी आवाज अच्छी है, मुंह भी कमाल का।’ सलाइवा टपक रहा था, 10 मिनट तक ब्लोजॉब चला। मेरा लंड चमक उठा। अब मैंने रसमिया को बिस्तर पर लिटाया। उसकी पेटीकोट ऊपर किया, पैंटी उतारी। उसकी चूत साफ शेव्ड, गुलाबी और गीली। मैंने उंगली डाली—टाइट थी, कुंवारी जैसी। ‘अह्ह सर… धीरे…’ वो चीखी। मैंने दो उंगलियां अंदर-बाहर कीं, उसका रस बहने लगा।
‘रसमिया, तैयार हो?’ मैंने पूछा। वो बोली, ‘हां सर, चोदो मुझे। अपनी छात्रा की चूत फाड़ दो।’ मैंने लंड का सिरा उसकी चूत पर रगड़ा, फिर एक झटके में अंदर धकेल दिया। रसमिया चीख पड़ी—’आह्ह्ह… दर्द!’ लेकिन मैं रुका नहीं। धीरे-धीरे पेलने लगा। उसकी चूत मेरे लंड को कसकर जकड़ रही थी। पूरी तरह अंदर जाने के बाद, मैंने स्पीड बढ़ाई। जोर-जोर से ठोकने लगा—ठक-ठक की आवाज कमरे में गूंजी। रसमिया अब दर्द भूल चुकी थी, वो मेरी पीठ नाखूनों से खरोंच रही थी। ‘सर… हां… चोदो… तेज…’
मैंने उसके स्तनों को दबाते हुए चुदाई जारी रखी। 15 मिनट बाद, पोजीशन बदली—डॉगी स्टाइल। रसमिया घोड़ी बनी, उसके गोल कूल्हे मेरे सामने। मैंने पीछे से लंड ठोका। पट-पट की आवाज तेज हो गई। उसके बाल पकड़े, जोर से खींचे। ‘ले साली… तेरी चूत कितनी टाइट है।’ रसमिया की सिसकारियां बढ़ गईं। ‘सर… मैं झड़ने वाली हूं… अह्ह्ह!’ उसका शरीर कांप गया, चूत सिकुड़ गई, रस छूटा। मैं भी सहन न सका—’ले रसमिया… मेरा माल!’ और गरम वीर्य उसकी चूत में भर दिया।
हम थककर लेट गए। रसमिया मेरी छाती पर सिर रखकर बोली, ‘सर, वो पहली कॉल से ही मैं आपकी हो गई थी। अब हर रात आपकी आवाज सुनूंगी, और ये…’ मैं मुस्कुराया। वो रात हमारी पहली चुदाई की थी, लेकिन वादा किया अगली मुलाकात का। शिक्षक-छात्रा का रिश्ता अब गहरा हो चुका था—शारीरिक और भावनात्मक।